सुबह की हल्की सुनहरी धूप रेशमी परदों से छनकर कमरे में फैल रही थी।
महल के अंदर एक अबनोरमल सी शांति थी, लेकिन उस शांति के पीछे हर कोई तैयारियों में बिजी था। पूरे घर में धीमी- धीमी आहटें गूँज रही थीं।

सुबह की हल्की सुनहरी धूप रेशमी परदों से छनकर कमरे में फैल रही थी।
महल के अंदर एक अबनोरमल सी शांति थी, लेकिन उस शांति के पीछे हर कोई तैयारियों में बिजी था। पूरे घर में धीमी- धीमी आहटें गूँज रही थीं।

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