रूहानी ने अपनी आँखें मूँद रखी थीं और वह अद्वैत के गले से बहते गर्म लहू का घूंट ले रही थी, अद्वैत की गर्दन से खून की लाल धार बहकर उसकी छाती की ओर उतर रही थी। दर्द और एक अजीब से आनंद के मिश्रण से अद्वैत के मुँह से केवल एक हल्की कराह निकली— "उफ़..."।
अद्वैत ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने दाँत भींच लिए, इस दर्दनाक चुभन को सहते हुए उसके माथे पर पसीने की बूंदें उभर आईं।




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