बाहर देवदार के लंबे पेड़ों पर बर्फ जम चुकी थी और खिड़कियों के शीशों पर धुंध की पतली परत चढ़ी हुई थी। हवेली के भीतर जलती फायरप्लेस की गर्मी भी उस अजीब बेचैनी को कम नहीं कर पा रही थी जो पिछले कुछ दिनों से पूरे घर में फैल चुकी थी।
रूहानी सोफे पर चुपचाप बैठी थी।




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