रयान और अनन्या दिल्ली की सड़कों पर घूम रहे थे। अनन्या चाहकर भी अपनी खुशी नहीं छिपा पा रही थी—दिल्ली की शाम और वहां की रोशनियां उसे किसी सपने जैसी लग रही थीं। उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी और वह हर छोटी चीज़ को ऐसे देख रही थी जैसे पहली बार देख रही हो। उसे पूरा यकीन था कि आसपास के लोग उसे एक टूरिस्ट समझ रहे होंगे क्योंकि वह काफी एक्साइटेड दिख रही थी।
"डिनर के लिए तैयार हो, चेरी?" रयान ने अनन्या को अपनी ओर खींचते हुए पूछा। अनन्या मुस्कुराई और उसने धीरे से अपना सिर हिला दिया।





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