मनाली की ठंडी वादियों में धूप खिली थी, लेकिन रूहानी के मन में कोहरा छाया हुआ था। उसने अपने मखमली गाउन की आस्तीन के नीचे अपने दोनों हाथों की उंगलियों को इतनी जोर से भींचा कि उसके पोर सफेद पड़ गए। उसके अंगूठे की अंगूठी उसकी बेचैनी की गवाह थी।
उसने खुद को समझाने की कोशिश की, "शायद यह पन्न वाला सारा हादसा है जिसने मुझे इतना बेचैन कर दिया ।





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