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" yes" for me

मेरी तरफ से "हां" है

। । पिछले चैप्टर में हमने पढ़ा था कि । ।

"मुझसे वादा करो कि तुम शिवानी से कुछ नहीं कहोगी... तुम नहीं लाओगे"

आप उसके सामने यह टोपीक नहीं लाओगी ...उसे ऐसे ही रहने दो.. .उसे अपना लास् यर पूरा करने दो और... भले ही मेरी तरफ से हाँ हो, उसे खुद को ना कहने से रोकना नहीं चाहिए अगर वह आगे पढ़ना चाहती है... हम अपने फैसले उस पर नहीं थोपने जा रहे हैं.. .किसी भी टाइम फाइनल डीसीजन उसका होना चाहिए..."

"मैं प्रोमिस करती हूँ..." निवेदिता ने कोफीडेंस में कहा और फिर उसके गाल को सहलाते हुए कहा था । ।

"और बहुत -बहुत थैंक यू आरव ...मेरा यकीन करो तुम मेरी पसंद के लिए थैंक फुल होगे..."

आरव ने मुस्कुराया और कहा "देखते हैं..."

उन्होंने एक- दूसरे को गुड नाईट विश दीं और वह अपने बिस्तर पर लेट गया, गहरी सोच में डूबा हुआ, और खुद से कहा था । ।

"तो... मुझे कल से उसके लिए अपना नज़रिया बदलना होगा..."

" देखते हैं..."

। । और अब आगे पढें । ।

अगली सुबह, आरव ऑफिस के लिए तैयार हो गया और नाश्ते पर निवेदिता के साथ शिवानी को देखने के लिए नीचे आया था ।

शिवानी निवेदिता से कह रही थी "आंटी... यह आपका जूस और आपकी गोलियाँ हैं... मैंने अपने और उसके लिए नाश्ता पैक कर लिया है..."

आरव को डाइनिंग की ओर आते देख, वह खड़ी हो गई और रसोई में चली गई, जबकि वह अपनी माँ को गुड मॉर्निंग विश देने के बाद बैठ गया था ।

"आपका इकोनॉमिक टाइम्स और सुबह की चाय..." शिवानी ने उसे देते हुए कहा था । और वह मुस्कुराया और कहा ।

" थैंक यू ..."

उसने भी मुस्कुराहट का जवाब दिया और अपना जूस लेकर बैठ गई थी ।

पिछले कुछ महीनों से, वह उनकी रुटीन में इतनी ढल गई थी कि उसे उस घर में काम करने का तुरंत शौक हो गया था ।

निवेदिता ने आरव को शिवानी की ओर देखने के लिए कहा, जबकि उसने अपनी आँखें घुमाई और आह भरी थी ।

शिवानी पैक्ड नाश्ता लेने के लिए अंदर गई और उसने फुसफुसाते हुए कहा "मोम प्लीज... कल रात ही हमने इस बारे में बात की थी और तुमने सुबह -सुबह ही शुरू कर दिया... मुझे थोड़ा -सा टाइम दो मोम ..."

"बेशक बेटा... अपना टाइम लो लेकिन सोचना जरूर... मैं तुम्हें बस याद दिला रही थी..." उसने कंधे उचकाते हुए और मुस्कुराते हुए कहा था ।

"चले??" आरव ने शिवानी की ओर देखते हुए पूछा और उसने सिर हिलाकर कहा "जी"

"क्या तुमने अपने रिकॉर्ड रख लिए...?? तुमने कहा था कि आज तुम्हारी लैब है...??" आरव ने पूछा और उसे अपनी जीभ काटते हुए अपने कमरे में भागते हुए अपने रिकॉर्ड लाने के लिए कहा जो उसने दो दिन पहले पूरे किए थे । वह शर्म से मुस्कुराई जिससे आरव बेयकीनी में अपना सिर हिलाने लगा और निवेदिता हंस पड़ी थी ।

उन्होंने निवेदिता को बाय कहा और उसके कॉलेज के लिए निकल पड़े थे ।

शिवानी ने नोटिस किया कि वह बहुत चुप था और गहराई से सोच रहा था । ओर दिनों के उलट जब वह उसकी क्लासेज के बारे में पूछता रहता था ।

"आप ठीक हो ना...??" शिवानी ने उसे पूछा था जब वे उसके कॉलेज पहुँचने वाले थे ।

आरव ने उसकी तरफ देखा और शिवानी ने तुरंत नीचे देखा था और कहा "नहीं वो... तुम बहुत चुप हो... और ऐसा लगता है कि तुम किसी बात को लेकर टेंशन में हो..."

आरव ने आह भरी और उसके कॉलेज के पास रुक गया और वह नीचे उतरने से पहले वापस मुड़ी और कहा " "Don't worry. शिवानी .. .. .तुम्हें अपने सारे जवाब मिल जाएँगे..."

वह थोड़ा मुस्कुराया और आगे कहा "मुझे उम्मीद है ..."

वह भी मुस्कुराई और अपनी क्लास में जाने से पहले उसे बाय कहा और वह अपनी मोम कि बातों के बारे में सोचते हुए अपने ओफीस चला गया था ।

दोपहर को लंच टाइम में ,

वह शिवानी का कोल आता देखकर हैरान रह गया और उसने फोन उठाया था ।

"आपने लंच किया...??" शिवानी ने पूछा और उसने उलझन भरे लहजे में जवाब दिया "नहीं... मुझे अभी करना है..."

"मुझे लगा ही था... आप सुबह से ही परेशान थे ...मुझे लगा कि शायद आपने अपना लंच नहीं किया होगा..." उसने मुस्कुराते हुए कहा था ।

आरव ने पूछा "क्या तुमने लंच कर लिया ...??"

"करने वाली हूँ" उसने जवाब दिया और आगे कहा था ।

"आप भी खा लीजिए..."

उसने हम्म किया और कॉल काट दिया और उन इंसिडेंट को रिवाइंड किया जब भी शिवानी उसे काम के बारे में टेश या स्ट्रेस देखकर बेतरतीब ढंग से कॉल करती थी और लंच के बारे में पूछती थी ।

उसने अपना सिर हिलाया और उसी टाइम काम करते हुए अपना लंच ले लिया था ।

रात को जब शिवानी अपनी किताबों के साथ थी, तो उसके मोबाइल पर आरव का मेसेज आया था -

' मुझे देर हो जाएगी...मोम को इंफोरम कर देना...'

आरव के लिए आखिरी बार डायल किए गए नंबर के अकोरडिंग पर शिवानी या निवेदिता में से किसी को भी पिंग करना आसान हो गया था ।

शिवानी ने हाँ कहकर जवाब दिया और किचन में जाकर देखा कि निवेदिता ने रात का खाना बनाना लगभग पूरा कर लिया था ।

"आंटी... उन्होंने फोन किया कि उन्हें देर हो जाएगी..." उसने कहा और निवेदिता ने फसटरेशन में कराहते हुए कहा "यह बंदा मैं तुम्हें बता दूँ... मुझे बहुत भूख लगी है.. .मैं उसका इंतज़ार नहीं कर सकती... और तुम...??"

शिवानी ने जवाब दिया "मैं एक टोपीक पर नोट्स बना रही हूँ... इसे पूरा करने के बाद मैं खाना खा लूंगी ..."

उसने आह भरी और अपना खाना खाया और एक घंटे बाद, उसने शिवानी को कहा था "तुम खा लो बेटा... और अगर तुम्हें नींद आ रही हो तो सो जाओ... उसे अकेले खाना सर्व करके खाने दो... मैं अपने कमरे में जा रही हूँ..."

शिवानी ने हँसते हुए उसे गुड नाईट कहा और अपने नोट्स बनाए थे ।

जब उसने दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनी तो उसने अपनी नींद भरी आँखें खोलीं और आरव को देखा था ।

आरव ने उसे थकी हुई मुस्कुराहट दी थी ।

"मैं टेबल लगाती हुं" शिवानी ने उसे कहा था ।

आरव ने उन रातों के बारे में सोचा जब शिवानी पुरे पेशंस के साथ उसके लौटने का इंतज़ार करती थी और उसे खाना सर्व करने के बाद ही सोती थी और सिर्फ़ उसके साथ ही खाना खाती थी, सिवाय उन दिनों के जब वह शहर से बाहर होता था ।

शिवानी ने पहले भी कई बार ऐसा किया था , लेकिन जब आरव ने इस पर ध्यान देने का फैसला किया, तो यह उसके लिए एक बड़ी तस्वीर बन गई थी ।

"एक ही दिन में...!!!!" आरव ने फ्रेश होने के बाद अपने ट्रैक पहनते हुए सोचा और ख्यालों को झटक दिया और उसे बर्तन गर्म करने के बाद सेट करते हुए देखने के लिए नीचे चला गया था ।

शिवानी ने उसे पहले सर्व किया और आरव ने पूछा "क्या तुमने खाया...?", हालाँकि उसे जवाब पता था और शिवानी ने सिर हिलाकर मना कर दिया था ।

आरव ने उसकी प्लेट पलट दी और उसे बैठने का इशारा किया और उन्होंने साथ में खाना खाया था ।

"क्या तुम स्टडीज कर रही थी...??" उसने पूछा और शिवानी ने सिर हिलाते हुए कहा " मैं अपने लास्ट सेमेस्टर की प्रोजेक्ट के लिए टोपीकस ढुंढ रही थी और अपने प्रोफेसर को दिखाने के लिए एक शोर्ट नोट्स तैयार कर रही थी..."

आरव ने सिर हिलाया और शिवानी ने उसे पूछा था ।

"अभी आप ठीक हो...??"

"हाँ" आरव ने केजुअल तरीके से कहा और शिवानी ने आगे कुछ नहीं पूछा था ।

"क्या तुम्हें किसी मदद की ज़रूरत है...?" आरव ने खाना खत्म करने और उसे अपनी किताबें लेते हुए देखने के बाद पूछा था ।

"नहीं, मेरा काम हो गया... मुझे अपने टीम मेम्बर्स से इस पर डीसकसन करनी होगी..." उसने कहा और उसने कहा "ठीक है... गुड नाईट ..."

"गुड नाईट " उसने जवाब दिया और उसके ऊपर जाने तक इंतजार कीया था ।

वह अपने कमरे में प्रवेश करने से पहले रुक गया और रेलिंग के पास खड़ा हो गया और उसने देखा कि वह टेबल साफ कर रही है और मेन गेट बंद कर रही है, लाइट बंद कर रही है और फिर अपने कमरे में चली गई थी ।

उसने अपने निचले होंठ को काटा और समझ गया कि उसकी मोम क्यों चाहती थी कि वह उसके बारे में सोचे ।

कुछ दिन बीत गए और निवेदिता ने आरव को हर तरह से सोचने और अपने डीसीजन पर आने दिया था ।

उस सुबह जब आरव उसे कॉलेज छोड़ने जा रहा था, तो शिवानी ने कहा " मुझे अपने प्रोजेक्ट के लिए कुछ सामान लेने जाना है..."

"अभी??" आरव ने पूछा था ।

"शाम को " उसने जल्दी से कहा था क्ष।

"अकेली..?? क्या मैं आऊं या ड्राइवर को भेजूं..??"आरव ने पूछा और शिवानी ने अपना सिर हिलाते हुए कहा "नहीं मैं अपने टीम मेम्बर्स के साथ जाऊंगी..."

"ओह ठीक है..." आरव ने कहा और उसके कॉलेज के आगे रुक गया और शिवानी ने झिझकते हुए पूछा "तो मैं जाऊं...?"

आरव ने कई बार शिवानी से कहा था कि परमिशन मत मांगो, बस इंफोरम करो और जाओ, लेकिन उसने हर बार उसकी या निवेदिता की परमिशन लेना जरूरी समझा था ।

उसकी हां का इंतज़ार कर रही लड़की को देखकर, आरव का छिपा हुआ मेल इगो हर बार सेटिस्फाइड हो जाता था, हालाँकि वह नहीं चाहता था कि शिवानी किसी भी बात के लिए परमिशन मांगे ।

"हाँ हाँ... लेकिन क्या मैं तुम्हारे टीम मेम्बर्स के नंबर ले सकता हूँ!!? सिर्फ़ सैफटी रिजंस के लिए..." आरव ने अपना मोबाइल निकालते हुए पूछा और वह हमेशा की तरह उसकी केयर देखकर खुश हो गई थी ।

शिवानी ने उसे नंबर्स के मेसेज भेजे और उसने उन्हें पढ़ा " रोहित, मोनिशा... दो लड़के और दो लड़कियाँ...!!?"

उसने सिर हिलाया और उसने जवाब दिया "ठीक है... ठीक है... केयरफुल रहना... कुछ भी ज़रूरी हो, तो बस मुझे फ़ोन करना ...और घर पहुँचने पर मुझे बताना... ठीक है...??"

"जी" शिवानी ने मुस्कुराते हुए कहा और अपनी क्लास में चली गई थी ।

"हो सकता है मोम सही कह रही हो..." आरव के सबकॉन्शांइस मनने कहा था , लेकिन जल्दी ही सोचा 'आरव ...तुम्हारे साथ और भी बहुत सी चीजें जुड़ी हैं और उन्हें देखो और तय नहीं किया जा सकता... इसे ध्यान में रखना...'

उसने साँस छोड़ी और अपने ओफीस की ओर चला गया, यह सोचते हुए कि उसे कुछ और टाइम देना चाहिए ।

कुछ दिनों बाद,

आरव ऑफिस से देर से लौटा, जबकि शिवानी हमेशा की तरह उसका इंतज़ार कर रही थी । वह उसे देखकर खड़ी हो गई और उसने फ्रेश होने से पहले थका हुआ मुस्कुराया था ।

जब वह वापस आया तो उसने उसे खाना सर्व किया और इससे पहले कि वह एक निवाला खा पाता, उसने देखा कि वह बहुत घबराई हुई थी । हालाँकि वह भौंहें सिकोड़ रहा था, लेकिन उसने भूख की वजह से अपना निवाला खा लिया था ।

उसकी भौंहें और गहरी हो गईं क्योंकि उसे दूसरे दिनों से अलग स्वाद मिला था ।

"इसे किसने बनाया?" उसने पूछा और वह डर के मारे हांफने लगी और बोली "मैं.. .मुझे माफ़ करना... मुझे पता है.. .मुझे लगा ही था कि यह अच्छा नहीं है... मैं दूसरा कुछ सर्व कर दूँगी... छोड़ो..."

उसने उसे घबराते हुए देखकर आह भरी और उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी प्लेट हटाने से रोका और कहा "शश.... क्या तुम प्लीज शांत हो जाओगी...!?? मैंने क्या पूछा...!?"

उसने घुटन भरी आवाज़ में कहा "वह सब्जी किसने बनाई है!"

"और मुझे लगता है.. .तुमने अभी तक इसका जवाब नहीं दिया है..." आरव ने कहा और शिवानी ने नीचे देखा और फिर कहा "मैं ने"

"अच्छा" उसने कहा और खाना जारी रखा जिससे वह हैरानी से उसकी ओर देखने लगी थी ।

आरव ने उसकी तरफ देखा और कहा "क्या...!!!??? यह अच्छी बनी है...हाँ यह मोम के बनाए खाने से अलग है लेकिन यह एकचुली में अच्छी है..."

उसने आह भरी और मुस्कुराई और उसने पूछा "तुमने इसके साथ क्या किया...??"

"मैंने इसमें शिमला मिर्च नहीं डाली" उसने अपनी प्लेट से खाते हुए कहा और उसने पूछा "ओह्ह यही अंतर है... लेकिन क्यों?"

"क्योंकि जब भी आंटी ने यह सब्जी बनातीं है, तो आपको मिर्ची हटाते हुए मैंने देखा है... मुझे लगा आपको यह पसंद नहीं है..." उसने कहा और आरव ने मुस्कुराते हुए कहा "यह सच है... मुझे मिर्ची पसंद नहीं है..."

कुछ मिनट की चुप्पी के बाद, उसने पूछा "लेकिन तुम इतनी घबरा क्यों गई...!? मेरा मतलब है कि क्या तुम मुझसे डरती हो...??"

उसने अपना सिर नीचे झुकाया और थोड़ा सिर हां में हिलाया और फिर कहा "मुझे पता है कि यह आपकी पसंदीदा डिश है... और मैं इसे खराब नहीं करना चाहती थी.. .इसलिए मैं डर गई थी कि अगर आपको यह पसंद नहीं आया तो क्या होगा...!!!"

उसने आह भरते हुए पूछा "सिर्फ इतना ही नहीं शिव ... क्या तुम मुझसे हर टाइम डरती रहती हो...!?"

"मुझे आपके टोन से डर लगता है... लेकिन हर टाइम तो नहीं ...!? ऐसा क्यों लगा आपको...!?" उसने पूछा था ।

आरव ने हंसते हुए कहा "मेरा मतलब है... जब भी तुम मुझे आते हुए देखती हो, तुम अपनी जगह से खड़ी हो जाती हो... तुम हर काम करने से पहले मेरी परमिशन मांगती हो... तुम कभी बहस नहीं करती या मुझे जवाब नहीं देती... यह सब क्या है...!?"

"यही मेरी आपके लिए रिस्पेक्ट है..." शिवानी ने उसकी ओर देखे बिना कहा और उन्होंने अपना खाना खत्म कर लिया था । उसने बर्तन साफ किए और आरव ने पूछा "मैंने तुमसे यह रिस्पेक्ट पाने के लिए क्या किया...!?"

शिवानी ने उसकी ओर देखा और कहा " रिस्पेक्ट पाने के लिए कुछ करने की ज़रूरत नहीं है... हम बस किसी इंसान का सम्मान कर सकते हैं कि वह कौन है... मैं आपकी रिस्पेक्ट उस पर्सनालिटी के लिए करती हूँ जो आप हो..."

वह मुस्कुराया और उसके साथ सोफे पर बैठ गया और पूछा "तुम्हारा क्या मतलब है...!? मेरी जो पर्सनालिटी है ...!?"

"शुरू से ही... मेरी माँ आपसे बहुत प्यार करती थी... हाँ, हमारे बीच कभी बातचीत नहीं हुई और बचपन में हम साथ में मस्ती नहीं कर पाए, लेकिन मुझे पता है कि माँ आपसे कितना प्यार करती थी..." शिवानी ने कहा था ।

और आरव अपनी श्यामा माँ को याद करके मुस्कुराया था , जबकि शिवानी ने आगे कहा "उस दिन... आप मेरे साथ खड़े रहे और मेरी वैलबिइंग के लिए फैसला लिया.. .मैं अपने रिश्तेदारों के बारे में जानती हूँ... जब मेरे अपने रिश्तेदारों ने कभी मेरी मां या मेरी परवाह नहीं की, तब आपने की... आपने अपनी माँ से नहीं पूछा या उन्हें अपने फैसले के बारे में नहीं बताया, लेकिन आपने वही किया जो मेरे लिए अच्छा था... आपने मुझे फिर लाइफ को आगे बढ़ने के लिए इंस्पायर किया है । चाहे लाइफ में कोई हो या कोई चला गया हो... "

" जिस तरह से आप मेरा ख्याल रखते हो... छोटी- छोटी बातों से लेकर बड़ी -बड़ी बातों तक... मेरे दोस्तों के कोटेकट रखने से लेकर यह देखने तक कि मैं घर पहुँच गयी हूँ या नहीं.. .एक बार नहीं बल्कि रोज़ाना..."

आरव ने अपनी भौंहें ऊपर उठाईं क्योंकि यह एक छिपा हुआ सिक्रेट था क्योंकि वह शुरू में अपनी मोम से पूछता था कि शिवानी कॉलेज से घर पहुँच गई है या नहीं । कुछ टाइम के बाद, वह सीधे उससे पूछने लगा लेकिन उसकी सेफ्टी के बारे में जानने के लिए एक दिन भी नहीं चूका था ।

वह मुस्कुराई और बोली "और सबसे इंपोर्टेड बात, जिस तरह से आप अपनी मोम का ख्याल रखते हो.. .मुझे पता है कि आप कभी भी उनसे पूछे बिना खाना नहीं खाओगे कि उन्होंने खाना खाया है या नहीं.. .चाहे आप कहीं भी हो, कितने भी बिज़ी हो, आप उन्हें फोन करके पूछोगे 'क्या तुमने खाना खाया? मोम '...इतना नहीं...!? हर बार जब मैं आपको खाना सर्व करती हूँ, तो आप मुझसे पूछे बिना कभी नहीं खाते कि मैंने खाया है या नहीं.. .और तब तक इंतजार करते हो जब तक मैं खुद को खाना सर्व नहीं कर लेती ..."

आरव उसकी तरफ देखकर मुस्कुराया और शिवानी ने कहा "आप अपनी मोम के सामने चट्टान की तरह खड़े रहे... और जैसा कि मैंने सुना है... जो सबसे अच्छा बेटा बनाता है, वह सबसे अच्छा पति भी होगा... तुम्हारी होनेवाली पत्नी बहुत लक्की होगी ..."

आरव उसकी बात पर हँसा और बोला ""Thank you so much""

"हाँ... गुड नाईट ..." उसने कहा और फिर अपने कमरे में चली गई, जबकि वह उसी जगह पर बैठा हुआ उसकी बातों और अपने लिए उसके पोइंट ओफ वयु के बारे में सोच रहा था ।

अगली सुबह, वे जाने के लिए तैयार थे और उसने शिवानी से कार में Wait करने को कहा था ।

"मोम " उसने पुकारा और निवेदिता हैरान होकर मुड़ी क्योंकि वह दरवाजे से वापस आ गया था ।

"बोलो आरव " उसने कहा था ।

"उम्म... मेरी ओर से हाँ..." उसने कहा और वह भौंहें सिकोड़ गई थी ।

उसने आह भरते हुए कहा "मैंने बहुत सोच लिया मोम ...मेरी तरफ से हाँ है... हाँ कुछ और बातें हैं लेकिन उन्हें देखा और तय नहीं किया जा सकता... मुझे उनके बारे में शिव से खुद ही बात करनी होगी... लेकिन इसके लिए, तुम्हें पहल करनी होगी और उससे बात करनी होगी..."

निवेदिता ने मुस्कुराते हुए कहा "मेरा बच्चा... बहुत -बहुत थैंक यू ...मैं उससे शाम को बात करूँगी..."

"मोम ...इस मेटर को एकदम डीरेकटली मत पुछना ... बस शादी और फ्यूचर की प्लानिंग के बारे में उसकी राय पर एक नोर्मल बातचीत करो... हमने तय किया है कि हम अपने फैसले उस पर नहीं थोपेंगे... याद है ना ???" उसने पूछा और वह सिर हिलाते हुए मुस्कुराई "मुझे याद है आरव ...अगर वह नहीं चाहती तो मैं इस टोपीक को आगे नहीं बढ़ाऊंगी । अगर वह शादी नहीं करना चाहती तो मैं इसे आगे नहीं बढ़ाऊँगी... मैं उसके फ्यूचर प्लानिंग के बारे में

जानने के बाद ही इसे आगे बढ़ाऊँगी..."

""Thanks Maa..." आरव ने उन्हें गले लगाते हुए कहा था .

गलतियों को नज़रअंदाज़ करें...

देखते हैं क्या होता है आरव अपने लाइफ पार्टनर में क्या देखना चाहते हैं... आप क्या सोचते हैं...??

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सुखी रहें । । सुरक्षित रहे । । पढ़ते रहे । ।

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